झारखंड में शिक्षा विभाग से जुड़े तीन मंत्रियों की पद पर रहते मौत, सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से फिर गमगीन हुआ राज्य

रांची। झारखंड की राजनीति में एक बार फिर दुखद अध्याय जुड़ गया है। राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री और गिरिडीह से झामुमो विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का 5 सितंबर 2026 की देर रात निधन हो गया। अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गिरिडीह के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झारखंड में शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्रियों के पद पर रहते निधन की दुखद घटनाएं एक बार फिर चर्चा में हैं। पिछले कुछ वर्षों में जगरनाथ महतो और रामदास सोरेन का भी मंत्री पद पर रहते निधन हुआ था। हालांकि तीनों के निधन की परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं।
सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सुदिव्य कुमार सोनू झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। वे लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए थे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
5 सितंबर की रात अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से गिरिडीह समेत पूरे झारखंड में शोक की लहर फैल गई।
2025 में रामदास सोरेन का हुआ था निधन
इससे पहले घाटशिला से झामुमो विधायक रामदास सोरेन का 15 अगस्त 2025 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हुआ था। वे उस समय झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री थे और 62 वर्ष के थे।
रामदास सोरेन को उनके आवास पर बाथरूम में गिरने के बाद गंभीर चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया था। करीब 15 दिनों तक अस्पताल में इलाज चलने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
2023 में जगरनाथ महतो ने ली थी अंतिम सांस
इससे पहले डुमरी के विधायक और तत्कालीन शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का 6 अप्रैल 2023 को चेन्नई के अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हुआ था। वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे और उपचार के लिए चेन्नई ले जाए गए थे।
जगरनाथ महतो झारखंड की राजनीति में ‘टाइगर जगरनाथ’ के नाम से भी चर्चित थे। उनके निधन के समय उनकी उम्र करीब 56 वर्ष थी। वह डुमरी विधानसभा क्षेत्र से झामुमो के विधायक थे और निधन के समय राज्य सरकार में शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
तीनों मामलों में अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत
पिछले कुछ वर्षों के घटनाक्रम पर नजर डालें तो शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे तीन नेताओं—जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन और अब सुदिव्य कुमार सोनू—का निधन उनके मंत्री पद पर रहते हुआ। तीनों मामलों में अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु हुई, हालांकि उनकी स्वास्थ्य परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं।
जगरनाथ महतो का निधन चेन्नई में उपचार के दौरान हुआ, रामदास सोरेन ने दिल्ली के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा और सुदिव्य कुमार सोनू की गिरिडीह के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई।
अब किसे मिलेगी शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी?
सुदिव्य कुमार सोनू के आकस्मिक निधन के बाद अब राज्य की हेमंत सोरेन सरकार के सामने उनके पास रहे विभागों की जिम्मेदारी तय करने की चुनौती होगी। खास तौर पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी अब किस मंत्री या विधायक को सौंपी जाएगी, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर रहेगी।
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से झारखंड की राजनीति को बड़ा झटका लगा है। उनके आकस्मिक निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। राज्य में उनके निधन से शोक का माहौल है और उनके समर्थक उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
