
जगदीश भारती/कथारा। डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, सीसीएल कथारा में शनिवार, 22 अगस्त 2026 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस (COE), पटना के तत्वावधान में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का आयोजन 22 और 23 अगस्त को किया जा रहा है। इसका मुख्य विषय “नैतिकता और सत्यनिष्ठा” रखा गया है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, डीएवी गान एवं मधुर स्वागत गीत के साथ गरिमापूर्ण वातावरण में हुआ। विद्यालय के वेन्यू डायरेक्टर सह प्राचार्य एवं झारखंड जोन-I के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ. जी. एन. खान ने सीबीएसई द्वारा मनोनीत दोनों रिसोर्स पर्सन का आत्मीय स्वागत किया।
कार्यशाला में एम.जी.एम. पब्लिक स्कूल, बोकारो की उप प्राचार्या श्रीमती राखी बनर्जी तथा जी.जी.पी.एस. बोकारो की वरिष्ठ शिक्षिका श्रीमती स्निग्धा सिन्हा ने साधनसेवी के रूप में शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।
आइस-ब्रेकिंग गतिविधि से हुई कार्यशाला की शुरुआत
कार्यशाला के पहले दिन विभिन्न सत्रों के माध्यम से शिक्षकों को नैतिकता, सत्यनिष्ठा और इनके व्यावहारिक पक्षों से जोड़ा गया। प्रथम सत्र की शुरुआत रिसोर्स पर्सन श्रीमती राखी बनर्जी द्वारा कराई गई आइस-ब्रेकिंग गतिविधि से हुई। इस गतिविधि ने प्रतिभागियों के बीच संवाद बढ़ाने के साथ-साथ उनमें नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
इसके बाद शिक्षकों ने संज्ञानात्मक विषमता (Cognitive Dissonance) जैसे विषय पर विचार-विमर्श किया। सत्र के दौरान नैतिक दुविधाओं को समझने और विभिन्न परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।
सत्यनिष्ठा के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा
कार्यशाला के अगले सत्रों में सत्यनिष्ठा की मूलभूत अवधारणाओं तथा उसके व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। शिक्षकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि विद्यालयी वातावरण में नैतिक मूल्यों को किस प्रकार व्यवहार और शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा सकता है।
अंतिम सत्रों में रिसोर्स पर्सन श्रीमती स्निग्धा सिन्हा के मार्गदर्शन में ‘X-Y गेम’ तथा मनोवैज्ञानिक लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास के सिद्धांत पर आधारित विभिन्न गतिविधियां कराई गईं। इन गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण को प्रभावी तरीके से विकसित करने के व्यावहारिक तरीकों की जानकारी मिली।
डॉ. जी. एन. खान ने बताया कार्यशाला का महत्व
कार्यशाला के अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में वेन्यू डायरेक्टर सह प्राचार्य डॉ. जी. एन. खान ने क्षमता संवर्धन कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों के लिए एक ‘संस्कारशाला’ की तरह काम करती हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के शिल्पकार होते हैं और उनके भीतर नैतिक मूल्यों एवं सत्यनिष्ठा का मजबूत होना बेहद आवश्यक है। ऐसे आयोजन शिक्षकों के पेशेवर कौशल को बेहतर बनाने के साथ-साथ उन्हें विद्यार्थियों के सामने एक अनुकरणीय रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत होने की प्रेरणा देते हैं। जब शिक्षक स्वयं नैतिकता और सत्यनिष्ठा का पालन करते हैं, तभी वे आने वाली पीढ़ी में चरित्र निर्माण के मूल्यों को प्रभावी ढंग से स्थापित कर सकते हैं।
विद्यालय के शिक्षकों का रहा महत्वपूर्ण योगदान
कार्यशाला के प्रथम दिवस के सफल संचालन एवं बेहतर व्यवस्था में वेन्यू डायरेक्टर डॉ. जी. एन. खान के मार्गदर्शन में विद्यालय के एसटीएनसी नागेंद्र प्रसाद, डिप्टी एसटीएनसी पंकज कुमार एवं जितेंद्र दुबे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके अलावा वरिष्ठ शिक्षक डॉ. आर. एस. मिश्रा, बी. के. दसौंधी, श्रीमती आराधना, रेखा कुमारी, वीणा कुमारी, मधुमल्लिका उपाध्याय, रंजीता सिंह, रंजीता पाण्डेय, ओशीन, अर्शिया एजाज, खुशबू कुमारी, बबली कुमारी, सुमन कुमारी, ममता पात्रा, संगीत कुमार, अश्विनी कुमार तथा रिया सिन्हा सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा।
दो दिवसीय यह कार्यशाला शिक्षकों के पेशेवर विकास के साथ-साथ विद्यालयी शिक्षा में नैतिक मूल्यों और सत्यनिष्ठा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में आयोजित की जा रही है।