न टेंट, न भरपेट भोजन… घनघोर बारिश में भी जारी है झारखंड छात्रों का आंदोलन, JPSC-JSSC भर्ती में पारदर्शिता की मांग
रांची: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। बिना किसी बड़े इंतजाम, बिना टेंट और सीमित संसाधनों के बीच छात्र घनघोर बारिश में भी अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं। छात्रों का यह अनुशासित और शांतिपूर्ण आंदोलन अब राज्य के साथ-साथ देशभर में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक विरोध का हिस्सा नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर है। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
14वीं JPSC PT रिजल्ट के बाद शुरू हुआ विवाद
छात्र आंदोलन की शुरुआत 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) के परिणाम
जारी होने के बाद हुई। छात्रों ने आरोप लगाया कि परीक्षा परिणाम और भर्ती प्रक्रिया में कई स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसके बाद छात्रों ने 25 जुलाई से सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया। बाद में रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्र धरना देकर बैठ गए। आंदोलन को अब लगातार 12 दिन पूरे हो चुके हैं।
बारिश के बीच भी छात्रों का संघर्ष जारी
राजधानी रांची में लगातार बारिश के बावजूद छात्र धरना स्थल पर डटे हुए हैं। कई छात्र खुले आसमान के नीचे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। आंदोलन की खास बात यह है कि छात्र इसे पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से चला रहे हैं।
छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी प्रतिक्रिया
इस मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं से अवगत है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से देख रही है और विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई करेगी।
हाई लेवल कमेटी का गठन, छात्रों की मांग बरकरार
सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है, लेकिन छात्रों का कहना है कि अभी तक कमेटी धरना स्थल पर नहीं पहुंची है।
इधर, छात्र 10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी में जुटे हुए हैं। वहीं भूख हड़ताल पर बैठे कुछ आंदोलनकारियों ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
देशभर में चर्चा का विषय बना आंदोलन
झारखंड छात्रों के इस आंदोलन की तुलना हाल के अन्य छात्र आंदोलनों से की जा रही है। बिना हिंसा, बिना विवादित नारों और शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे इस आंदोलन को सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर समर्थन मिल रहा है।
छात्रों का कहना है कि उनकी लड़ाई केवल परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के अधिकारों के लिए है।
