चंद्रपुरा में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत, 13 दिन बाद रोहित ने भी तोड़ा दम; अब सबसे बड़ा सवाल—किसने और क्यों किया?
पी. सोनी कुमारी: चंद्रपुरा के DVC कॉलोनी स्थित पश्चिमी पल्ली में 17 सितंबर को हुए गोलीकांड ने अब और गंभीर रूप ले लिया है। घटना में गंभीर रूप से घायल रोहित सिन्हा की रांची के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान 30 सितंबर को मौत हो गई। रोहित की मौत के साथ ही इस वारदात में मरने वालों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। इससे पहले उसके पिता नरेश सिन्हा और मां रेणु देवी की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई थी।
17 सितंबर की शाम DVC आवासीय कॉलोनी के पश्चिमी पल्ली स्थित परिवार के आवास में अज्ञात हमलावरों ने गोलीबारी की थी। पुलिस और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हमले में नरेश सिन्हा और उनकी पत्नी की घटनास्थल पर मौत हो गई, जबकि उनका बेटा रोहित गंभीर रूप से घायल हुआ था।
13 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा रोहित
गोलीबारी में रोहित को कई गोलियां लगी थीं। प्रारंभिक इलाज के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर उपचार के लिए रांची के मेदांता अस्पताल ले जाया गया था। करीब 13 दिनों तक इलाज चलने के बाद 30 सितंबर को उसकी मौत हो गई।
रोहित की मौत के साथ इस मामले की जांच में एक महत्वपूर्ण संभावित गवाह भी पुलिस के हाथ से चला गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस को उम्मीद थी कि रोहित की स्थिति बेहतर होने पर उसके बयान से घटना के पीछे की परिस्थितियों और हमलावरों तक पहुंचने में मदद मिल सकती थी।

17 सितंबर की रात आखिर हुआ क्या था?
रिपोर्टों के मुताबिक, 17 सितंबर की शाम करीब साढ़े सात बजे के आसपास पश्चिमी पल्ली स्थित क्वार्टर में गोलीबारी हुई थी। घटना के समय इलाके में बारिश भी हो रही थी। हमलावरों ने घर में प्रवेश कर फायरिंग की, जिसमें परिवार के तीन सदस्य निशाने पर आए।
घटना के बाद पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए। जांच में CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, डॉग स्क्वायड और बैलिस्टिक जांच जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

13 दिन बाद भी हत्या की वजह और आरोपियों पर सवाल
रोहित की मौत के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल इस पूरे हत्याकांड के पीछे का कारण और हमलावरों की पहचान का है।
30 सितंबर तक प्रकाशित प्रमुख रिपोर्टों में किसी आरोपी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस जांच में जुटी है और उपलब्ध भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
इस मामले में हत्या का कारण क्या था, हमलावर परिवार को ही निशाना बनाकर क्यों पहुंचे और वारदात के पीछे कितने लोग शामिल थे—इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

परिवार में अब कोई नहीं बचा
17 सितंबर की घटना में पहले माता-पिता की मौत हुई और गंभीर रूप से घायल बेटा 13 दिनों तक जिंदगी के लिए संघर्ष करता रहा। 30 सितंबर को रोहित की मौत के साथ परिवार के तीनों सदस्यों की जान चली गई।
घटना ने चंद्रपुरा के DVC कॉलोनी क्षेत्र में भी गहरा असर छोड़ा है। अब स्थानीय लोगों की नजर पुलिस जांच पर है कि इस वारदात में शामिल लोगों की पहचान कब होती है और घटना के पीछे की पूरी कहानी कब सामने आती है।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। हत्या के कारण और आरोपियों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।