कथारा कोलियरी में मजदूरों के संघर्ष का असर! 6 दिनों का धरना समाप्त, 12 सूत्री मांगों पर बनी सहमति
कथारा, बोकारो। मजदूरों की एकजुटता, संघर्ष और अधिकारों की आवाज के बीच कथारा कोलियरी में पिछले छह दिनों से जारी धरना आखिरकार समाप्त हो गया। BKT कंपनी के कर्मचारियों की 12 सूत्री मांगों को लेकर चल रहे इस आंदोलन का समापन सकारात्मक पहल और आपसी सहमति के बाद हुआ। इस दौरान झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) और भारतीय कोयला खदान मजदूर संगठन (BKMS) से जुड़े पदाधिकारियों ने मजदूरों के मुद्दों पर पहल करते हुए समाधान की दिशा में प्रयास किया।
धरने के दौरान मजदूरों ने वेतन, HPC दर, भविष्य निधि, स्वास्थ्य सुविधाओं, बोनस और रोजगार से जुड़ी विभिन्न मांगों को उठाया था। कर्मचारियों का उद्देश्य अपनी समस्याओं को कंपनी प्रबंधन के समक्ष मजबूती से रखना और श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों का समाधान सुनिश्चित कराना था। छह दिनों तक चले धरने के बाद सकारात्मक पहल के बीच आंदोलन समाप्त होने से संबंधित पक्षों के बीच आगे की कार्रवाई को लेकर उम्मीद जगी है।
12 सूत्री मांगों को लेकर मुखर हुए थे मजदूर
कथारा कोलियरी साइट पर कार्यरत BKT कंपनी के कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। मांग-पत्र में कुशल मजदूरों के लिए HPC दर लागू करने, मासिक वेतन भुगतान की तारीख निर्धारित करने, सभी श्रमिकों का आधिकारिक A-Form में पंजीकरण करने तथा EPFO की राशि समय पर जमा कराने जैसी मांगें शामिल थीं।
इसके अलावा कर्मचारियों ने ESI के तहत चिकित्सा सुविधा, समय पर वेतन पर्ची, रविवार को काम कराने पर दोगुना वेतन, दुर्गा पूजा के अवसर पर 8.33 प्रतिशत बोनस और नौकरी से हटाने से पहले निर्धारित प्रक्रिया अपनाने की मांग उठाई थी।
मांग-पत्र में मेंटेनेंस वर्कर, ब्लास्टिंग वर्कर, सुरक्षा कर्मियों और प्लांट से संबंधित कर्मचारियों का मासिक वेतन 21 हजार रुपये करने, मजदूरों के लिए शेड की व्यवस्था करने तथा ओवरमैन कर्मियों के पंजीकरण और HPC भुगतान से संबंधित मांगें भी शामिल थीं।

JLKM और BKMS के पदाधिकारियों ने की पहल
मजदूरों के आंदोलन को लेकर JLKM और BKMS के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों ने भागीदारी निभाई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, JLKM के केंद्रीय अध्यक्ष सह डुमरी विधायक डॉ. जयराम कुमार महतो तथा BKMS के केंद्रीय अध्यक्ष अजय महतो सहित कई पदाधिकारी मजदूरों की मांगों पर सहमति बनाने की दिशा में हुई पहल से जुड़े रहे।
इस दौरान BKMS के कोषाध्यक्ष सत्यप्रकाश महतो, केंद्रीय सह सचिव पवन रजक, केंद्रीय सचिव स्नेहा रानी, केंद्रीय महासचिव कुणाल महतो, केंद्रीय सचिव अमन रवि, केंद्रीय सचिव परवेज राजू, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल महासचिव अरुण कुमार, जिला उपाध्यक्ष उमेश महतो, प्रखंड सचिव महेश रजक, प्रखंड उपाध्यक्ष आनंद प्रजापति और केंद्रीय एससी मोर्चा सचिव अनिल रजक सहित अन्य पदाधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया गया है।
इसके अतिरिक्त JLKM और BKMS के केंद्रीय, जिला, प्रखंड तथा पंचायत स्तर के पदाधिकारी भी इस पहल में शामिल रहे।
छह दिनों के धरने के बाद निकला सकारात्मक रास्ता
मजदूरों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, छह दिनों तक चले धरने के बाद सकारात्मक पहल और आपसी सहमति के आधार पर आंदोलन समाप्त किया गया। इस घटनाक्रम को श्रमिकों के मुद्दों पर संवाद और सामूहिक प्रयास के जरिए समाधान तलाशने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, 12 सूत्री मांगों में से किन-किन बिंदुओं को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया है, किन मांगों पर आगे कार्रवाई होनी है और उनके क्रियान्वयन की समय-सीमा क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। इसलिए मजदूरों की वास्तविक राहत और समझौते के परिणाम का आकलन संबंधित शर्तों के स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा।
मजदूरों के अधिकार और सम्मान का मुद्दा फिर चर्चा में
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर मजदूरों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार संबंधी समस्याओं को चर्चा में ला दिया है। श्रमिक संगठनों की ओर से मजदूरों के सम्मान, अधिकारों की रक्षा और न्याय के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की प्रतिबद्धता जताई गई।
संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों का संदेश है कि मजदूरों और आम जनता के हितों के लिए संघर्ष तथा जनसेवा का प्रयास जारी रहेगा। उनका कहना है कि श्रमिकों को उचित अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
अब समझौते के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
छह दिनों के धरने की समाप्ति के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि 12 सूत्री मांगों पर बनी सहमति को किस तरह लागू किया जाता है। मजदूरों को वेतन, HPC दर, EPFO, ESI और अन्य सुविधाओं से संबंधित मांगों पर ठोस निर्णय और समयबद्ध कार्रवाई का इंतजार रहेगा।
कथारा कोलियरी में धरने का समाप्त होना फिलहाल आंदोलन के एक चरण का अंत है। आने वाले दिनों में कंपनी प्रबंधन की ओर से उठाए जाने वाले कदम और सहमति की शर्तें तय करेंगी कि मजदूरों की मांगों पर कितना समाधान हो पाता है।
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