त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों पर सरकार सख्त, मिलों को पर्याप्त स्टॉक रखने का निर्देश; 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात
नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में कीमतों पर नियंत्रण और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और उचित कीमत पर बिक्री सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सरकार का फोकस इस समय बाजार में कृत्रिम कमी और जमाखोरी रोकने के साथ-साथ त्योहारी मांग के दौरान चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने पर है।
10 लाख मीट्रिक टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार को इस कोटे के तहत अब तक करीब 8 लाख मीट्रिक टन के आयात के लिए आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
सरकार का मानना है कि अतिरिक्त आयात से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
दो महीने में करीब 20 फीसदी महंगी हुई चीनी
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले महीने चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। हालांकि हाल के दिनों में कीमतों में कुछ नरमी आई है, लेकिन वे अभी भी करीब दो महीने पहले के मुकाबले 20 प्रतिशत अधिक हैं।
सरकार के मुताबिक हालिया तेजी का कारण केवल त्योहारी मांग नहीं है। जमाखोरी और भविष्य में कीमतें और बढ़ने की आशंका में स्टॉक रोककर रखना भी कीमतों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई 2026 को चीनी की कीमत करीब ₹48.18 प्रति किलोग्राम थी, जो 20 अगस्त को बढ़कर ₹55.70 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी।
सरकार ने स्टॉक लिमिट भी घटाई
चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने चीनी डीलरों पर स्टॉक रखने की सीमा भी कम की है। 15 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक चीनी डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई है।
इसके अलावा, सरकार की टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी की आशंका की जांच की जा सके।
अक्टूबर से बढ़ेगी घरेलू चीनी की सप्लाई
त्योहारी सीजन में बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे, इसके लिए राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी गई है।
सरकार का अनुमान है कि इससे अक्टूबर में चीनी उत्पादन सामान्य 3-4 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 10 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा हो सकता है। इससे त्योहारों के दौरान बाजार में सप्लाई मजबूत होने की उम्मीद है।
भारत में पहली बार करीब एक दशक बाद ब्राजील से चीनी आयात
चीनी की घरेलू उपलब्धता बढ़ाने के लिए भारत इस बार ब्राजील से भी कच्ची चीनी मंगा रहा है। Reuters के मुताबिक करीब एक दशक बाद भारत ब्राजील से चीनी आयात कर रहा है।
इसके साथ ही देश की कुछ पोर्ट आधारित रिफाइनरियां घरेलू बाजार में करीब 2.5 लाख मीट्रिक टन रिफाइंड चीनी उपलब्ध कराने की तैयारी में हैं। इसका उद्देश्य त्योहारी सीजन से पहले घरेलू सप्लाई बढ़ाना है।
त्योहारों में क्यों बढ़ती है चीनी की मांग?
भारत में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों का सीजन रहता है। गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दशहरा और दिवाली के दौरान मिठाई, कन्फेक्शनरी और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत भी बढ़ जाती है।
इसी वजह से सरकार इस बार पहले से ही बाजार की निगरानी कर रही है, ताकि मांग बढ़ने के दौरान अचानक कीमतों में तेज उछाल न आए।
उत्पादन में कमी भी बनी वजह
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मौजूदा चीनी सीजन में उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहने की संभावना है। उत्पादन पर गन्ने में रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी, साथ ही कुछ क्षेत्रों में जलभराव जैसे कारणों का असर पड़ा है।
सरकार ने हालांकि स्पष्ट किया है कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और नई पेराई शुरू होने के बाद आपूर्ति में और सुधार होने की उम्मीद है।
सरकार की नजर अब कीमत और सप्लाई दोनों पर
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से हर महीने उत्पादन और बिक्री का सटीक आंकड़ा उपलब्ध कराने को कहा है। इससे सरकार को बाजार की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर समय रहते कदम उठाने में मदद मिलेगी।
सरकार ने संकेत दिया है कि यदि त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतों में अनुचित बढ़ोतरी या कृत्रिम कमी की स्थिति बनती है तो आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने?
सरकार के इन कदमों का सीधा उद्देश्य त्योहारों के दौरान बाजार में चीनी की कमी नहीं होने देना और कीमतों को नियंत्रण में रखना है। शुल्क-मुक्त आयात, स्टॉक लिमिट, जमाखोरी की निगरानी और अक्टूबर से बढ़ने वाली घरेलू सप्लाई के चलते आने वाले दिनों में चीनी बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।
फिलहाल सरकार की नजर चीनी के स्टॉक, उत्पादन, बिक्री और खुदरा कीमतों पर बनी हुई है।
