कसमार में सियार के हमले के बाद दो ग्रामीणों की मौत, छह गांवों में दहशत; घायलों की दोबारा जांच की मांग
पी. सोनी कुमारी : बोकारो जिले के कसमार प्रखंड क्षेत्र में सियार के हमले के बाद अब दो ग्रामीणों की मौत से इलाके में चिंता और दहशत का माहौल है। 12 अगस्त को एक सियार के हमले में छह गांवों के कुल 12 ग्रामीण घायल हुए थे। इनमें दुर्गापुर पंचायत के ललमटिया निवासी बुधनी देवी और टांगटोना पंचायत के तेलियाडीह निवासी 75 वर्षीय राधा महतो की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।
घटना के बाद घायलों का इलाज कराया गया और उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन भी दी गई थी। दो घायलों की मौत के बाद अब अन्य प्रभावित ग्रामीणों और उनके परिजनों में अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से सभी घायलों की दोबारा चिकित्सकीय जांच कराने तथा आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है।
12 अगस्त को छह गांवों में हुआ था हमला
जानकारी के अनुसार, 12 अगस्त को कसमार थाना क्षेत्र के नावाडीह, बगदा, टांगटोना, पुरनी बगियारी, रघुनाथपुर और ललमटिया गांवों में सियार ने कई लोगों पर हमला किया था। इस घटना में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों समेत 12 ग्रामीण घायल हुए थे।
घायलों में रूही कुमारी, राहुल महतो, राहुल कुमार, सागर कुमार स्वर्णकार उर्फ गौतम, राधा महतो, लालमणि देवी, पार्वती देवी, राकेश कुमार महतो, जुली कुमारी, अनूप कुमार महतो, झालु देवी और बुधनी देवी शामिल बताए गए हैं। इनमें राधा महतो और बुधनी देवी की मौत हो चुकी है।

पहले बुधनी देवी की हुई थी मौत
दुर्गापुर पंचायत के ललमटिया निवासी बुधनी देवी पर 12 अगस्त को सियार ने हमला किया था। उन्हें प्रारंभिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रांची स्थित रिम्स ले जाया गया, जहां 3 सितंबर को उनकी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हमले के बाद उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन की खुराक भी दी गई थी।
बुधनी देवी की मौत के बाद उनके परिवार ने सहायता की मांग की थी। वन विभाग की ओर से तत्काल सहायता राशि दिए जाने और मुआवजे की प्रक्रिया की भी रिपोर्ट सामने आई थी।
राधा महतो की हालत अचानक बिगड़ी
टांगटोना पंचायत के तेलियाडीह निवासी 75 वर्षीय राधा महतो पर भी 12 अगस्त को खेत में काम करने के दौरान सियार ने हमला किया था। परिजनों के अनुसार, उनका इलाज कसमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और बोकारो सदर अस्पताल में कराया गया था और उन्हें वैक्सीन भी दी गई थी।
इलाज के बाद वह सामान्य रूप से घर पर रह रहे थे। लेकिन 17 सितंबर की सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, उनके व्यवहार और बोलने के तरीके में असामान्य बदलाव दिखाई दिया। उन्हें तत्काल कसमार सीएचसी ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने रिम्स रांची रेफर किया। रिम्स पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

अन्य घायलों की बढ़ी चिंता
एक ही घटना में घायल दो लोगों की मौत के बाद बाकी प्रभावित ग्रामीणों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों की मांग है कि सभी घायलों की दोबारा चिकित्सकीय जांच, इलाज और स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा की जाए।
रिपोर्टों के अनुसार, वन विभाग और स्थानीय स्तर पर घायलों के उपचार एवं स्वास्थ्य स्थिति की समीक्षा की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। कुछ घायलों को रिम्स में जांच के लिए ले जाने की जानकारी सामने आई है।
वन्यजीव से सुरक्षा की मांग
ग्रामीणों ने क्षेत्र में जंगली जानवरों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और प्रभावित गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। लगातार दो मौतों के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
महत्वपूर्ण: सियार के काटने के बाद रेबीज का जोखिम गंभीर होता है। इस घटना में मौत के कारण और वैक्सीन की प्रभावशीलता को लेकर अंतिम निष्कर्ष चिकित्सकीय जांच और संबंधित स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।