BRICS Summit 2026: दिल्ली बनी अभेद्य किला, शी जिनपिंग-पुतिन के स्वागत से पहले 30 हजार जवान तैनात
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली इस सप्ताह दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक आयोजनों में से एक की मेजबानी करने जा रही है। 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में BRICS Leaders’ Summit 2026 आयोजित होगा। सम्मेलन में दुनिया के कई प्रभावशाली देशों के राष्ट्राध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधि हिस्सा लेने वाले हैं।
BRICS Summit से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। खास तौर पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की यात्रा को देखते हुए एयरपोर्ट से लेकर होटल और भारत मंडपम तक सुरक्षा का बहुस्तरीय घेरा तैयार किया गया है।
शी जिनपिंग 12 सितंबर, पुतिन 11 सितंबर को पहुंच सकते हैं
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के 11 सितंबर को भारत पहुंचने की उम्मीद है, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12 सितंबर को दिल्ली पहुंचने की संभावना है। दोनों नेताओं के लिए राजधानी के चाणक्यपुरी इलाके में अलग-अलग स्तर की विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
रिपोर्टों के अनुसार चीन और रूस की सुरक्षा टीमें भी पहले ही दिल्ली पहुंच चुकी हैं। होटल परिसर के अंदर से लेकर बाहरी हिस्सों और आसपास की छतों तक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। होटल कर्मचारियों का भी सत्यापन कराया गया है।
30 हजार सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा घेरा
BRICS Summit के दौरान दिल्ली में लगभग 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी सामने आई है। इसमें दिल्ली पुलिस के साथ अर्धसैनिक बलों के जवान भी शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग सेक्टर में बांटकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
भारत मंडपम, एयरपोर्ट, विदेशी मेहमानों के होटल और उनके आने-जाने वाले रास्तों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली में करीब 500 CCTV कैमरों और व्यापक सुरक्षा निगरानी की भी रिपोर्ट सामने आई है।
VIP काफिलों के लिए खास ट्रैफिक प्लान
विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के काफिलों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने विशेष रूट तैयार किए हैं। कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए जाने की तैयारी है।
रिपोर्टों के मुताबिक करीब 4,800 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को VVIP मूवमेंट संभालने के लिए तैनात किया जाएगा और 35 से ज्यादा प्रमुख मार्गों पर प्रतिबंध या डायवर्जन की व्यवस्था की जा सकती है।
मोदी-शी मुलाकात पर दुनिया की नजर
इस पूरे सम्मेलन में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात को लेकर है। शी जिनपिंग का भारत दौरा करीब सात साल बाद हो रहा है।
2020 की सीमा झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा। हालांकि पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें हुई हैं। BRICS Summit के दौरान दोनों नेताओं की बातचीत में सीमा संबंधी मुद्दों के साथ आर्थिक और द्विपक्षीय संबंधों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
पुतिन के साथ भी अहम बैठक
प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी द्विपक्षीय बातचीत होने की पुष्टि अधिकारियों की ओर से की गई है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की बातचीत में व्यापार, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
BRICS के सामने पश्चिम एशिया की चुनौती
इस बार BRICS Summit सिर्फ आर्थिक और बहुपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं रहने वाला। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच BRICS देशों के बीच इस मुद्दे पर सहमति बनाना भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
ईरान और UAE दोनों BRICS के सदस्य हैं, लेकिन पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रम को लेकर दोनों देशों के हित अलग-अलग हैं। ऐसे में सम्मेलन के अंत में जारी होने वाले संयुक्त बयान को लेकर भी बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिल्ली में सुरक्षा क्यों इतनी महत्वपूर्ण?
BRICS Summit में चीन, रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र और इंडोनेशिया समेत कई देशों के शीर्ष नेता शामिल होने वाले हैं। UAE के क्राउन प्रिंस और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस समेत कई अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधियों के भी पहुंचने की उम्मीद है।
यही वजह है कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को रोकने के लिए जमीन से लेकर हवाई क्षेत्र तक निगरानी मजबूत कर रही हैं। दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से भी सतर्क रहने और किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।
कुल मिलाकर, BRICS Summit 2026 भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन नहीं बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण आयोजन है। एक तरफ दिल्ली में दुनिया के बड़े नेता जुटेंगे, तो दूसरी तरफ भारत की नजर इस बात पर होगी कि BRICS के भीतर अलग-अलग हितों के बावजूद किस तरह साझा सहमति बनाई जाती है।
