बोकारो की जमीला बनीं ज्योति देवी, प्रकाश रविदास से रचाई शादी; जानिए पूरी कहानी

बोकारो की जमीला बनीं ज्योति देवी, बरेली में अपनाया सनातन धर्म; प्रकाश रविदास से रचाई शादी

बोकारो की जमीला खातून के ज्योति देवी बनने और प्रकाश रविदास से विवाह की खबर
बोकारो की जमीला खातून ने बरेली में सनातन धर्म अपनाने के बाद ज्योति देवी नाम से प्रकाश रविदास से विवाह किया।

पूर्व पति पर मारपीट, तीन तलाक और हलाला के दबाव का आरोप, बोलीं—अपनी इच्छा से लिया धर्म परिवर्तन का फैसला; भगवान शिव में है आस्था

बोकारो: झारखंड के बोकारो से सामने आई एक महिला की कहानी इन दिनों चर्चा में है। बोकारो की रहने वाली जमीला खातून ने बरेली पहुंचकर सनातन धर्म अपनाने के बाद अपना नाम ज्योति देवी रखा और हजारीबाग निवासी प्रकाश रविदास से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विवाह किया। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक विवाह बरेली स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कराया गया।

जमीला का कहना है कि भगवान शिव में उनकी आस्था पहले से रही है और उन्होंने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करने का फैसला लिया। वहीं उन्होंने अपने पिछले वैवाहिक जीवन को लेकर गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

जमीला ने पूर्व पति पर लगाए गंभीर आरोप

मीडिया से बातचीत में जमीला ने दावा किया कि उनका मुस्लिम रीति-रिवाज के अनुसार निकाह हुआ था। उनके अनुसार, शादी के बाद कथित तौर पर पति और ससुराल पक्ष की ओर से उनके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया।

जमीला का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया और अपनी धार्मिक आस्था को लेकर अपनी बात रखी तो परिस्थितियां और खराब होती गईं।

उनके अनुसार, बाद में उन्हें तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया गया।

जमीला ने यह भी आरोप लगाया कि दोबारा ससुराल में लौटने के लिए उन पर हलाला का दबाव बनाया गया।

नोट: ये आरोप जमीला द्वारा मीडिया के सामने लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में पूर्व पति या उनके परिवार का स्वतंत्र पक्ष सामने नहीं आया है, इसलिए आरोपों को पुष्ट तथ्य के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

“मैं मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गई थी”

जमीला के मुताबिक, लगातार कथित प्रताड़ना के कारण वह मानसिक रूप से बेहद परेशान हो गई थीं।

उन्होंने मीडिया को बताया कि परिस्थितियां ऐसी हो गई थीं कि उन्हें अपने जीवन को लेकर भी निराशाजनक विचार आने लगे थे।

इसी दौरान उन्होंने अपनी परेशानी हजारीबाग निवासी प्रकाश रविदास से साझा की। जमीला के अनुसार, प्रकाश ने मुश्किल समय में उनका साथ दिया।

बातचीत बढ़ी और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने के बाद उन्होंने साथ जीवन बिताने का फैसला किया।

बोकारो से बरेली तक पहुंची जमीला की कहानी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जमीला बोकारो जिले के लोधी नीचे टोला/कुर्कनालो क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि प्रकाश रविदास हजारीबाग जिले के निवासी बताए गए हैं। दोनों विवाह के लिए उत्तर प्रदेश के बरेली पहुंचे। �

बरेली पहुंचने के बाद दोनों अगस्त्य मुनि आश्रम गए, जहां धार्मिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद जमीला ने सनातन धर्म स्वीकार किया।
इसके बाद उनका नया नाम ज्योति देवी रखा गया।

धर्म परिवर्तन के बाद बनीं ज्योति देवी

रिपोर्टों के मुताबिक, आश्रम में धार्मिक अनुष्ठानों के बाद जमीला ने सनातन धर्म स्वीकार करने की घोषणा की।

इसके बाद उनका नाम ज्योति देवी रखा गया।

ज्योति ने कहा कि उन्होंने यह फैसला किसी दबाव, लालच या प्रलोभन में नहीं बल्कि अपनी इच्छा से लिया है। उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था भी व्यक्त की।

अगस्त्य मुनि आश्रम में हुई शादी

धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया के बाद जमीला और प्रकाश रविदास का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से कराया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए और साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।

आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार, विवाह से पहले पहचान और उम्र से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई थी। विवाह के बाद नवदंपति ने सुरक्षा की मांग भी की है।

ज्योति ने कहा—“भगवान शिव में मेरी आस्था है”

विवाह के बाद ज्योति देवी ने अपनी धार्मिक आस्था को लेकर खुलकर बात की।

उनका कहना है कि भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी आस्था है और उन्होंने इसी विश्वास के साथ अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया है।

उन्होंने यह भी कहा कि वह अब अपने जीवन में सम्मान, सुरक्षा और शांति चाहती हैं।

प्रकाश रविदास ने दिया साथ, फिर शादी का लिया फैसला

ज्योति के मुताबिक, कठिन परिस्थितियों के दौरान प्रकाश रविदास ने उनका साथ दिया।

दोनों के बीच बातचीत बढ़ने के बाद उन्होंने विवाह का फैसला किया। इसके बाद दोनों झारखंड से बरेली पहुंचे और वहां धार्मिक प्रक्रिया पूरी कर विवाह किया।

इस पूरी घटना के बाद यह मामला सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है।

कहानी ने खड़े किए कई बड़े सवाल

जमीला से ज्योति देवी बनने की यह कहानी सिर्फ धर्म परिवर्तन और विवाह तक सीमित नहीं है।

इसने एक साथ कई गंभीर सामाजिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं—

क्या किसी महिला को अपनी धार्मिक आस्था और जीवनसाथी चुनने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए?

घरेलू प्रताड़ना के आरोप सामने आने पर महिला की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित हो?

धर्म परिवर्तन और अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में प्रशासन की क्या भूमिका होनी चाहिए?

और सबसे महत्वपूर्ण—

क्या किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन वास्तव में उसकी स्वतंत्र इच्छा से हुआ है या उस पर कोई दबाव था—इसकी निष्पक्ष जांच कैसे हो?

इन सवालों का जवाब केवल सोशल मीडिया के दावों से नहीं, बल्कि संबंधित पक्षों और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच से ही मिल सकता है।

Dastak Live की अपील: संवेदनशील मामले को सनसनी नहीं, तथ्य के साथ समझें

जमीला खातून से जुड़ा यह मामला धर्म, विवाह, महिला अधिकार और कथित घरेलू प्रताड़ना जैसे संवेदनशील मुद्दों से जुड़ा है।

इसलिए पूर्व पति पर लगाए गए आरोपों को न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। इसी तरह जमीला के धर्म परिवर्तन को लेकर भी उनकी स्वयं की कही बात और उपलब्ध दस्तावेज/आधिकारिक रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मामले में दूसरे पक्ष का बयान सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

पूरी कहानी एक नजर में

मूल स्थान: बोकारो, झारखंड
पहले नाम: जमीला खातून
नया नाम: ज्योति देवी
विवाह: प्रकाश रविदास
विवाह स्थल: अगस्त्य मुनि आश्रम, बरेली
धार्मिक आस्था: भगवान शिव के प्रति आस्था का दावा
पूर्व पति पर आरोप: मारपीट, दुर्व्यवहार, तीन तलाक और हलाला के दबाव के आरोप
धर्म परिवर्तन पर उनका दावा: अपनी इच्छा से सनातन धर्म स्वीकार करने की बात
विवाह: हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह की रिपोर्ट

Dastak Live निष्कर्ष

बोकारो की जमीला खातून का ज्योति देवी बनना और प्रकाश रविदास से विवाह अब चर्चा का विषय बन चुका है। लेकिन इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसमें सामने आए व्यक्तिगत आरोपों और दावों को तथ्यात्मक जांच के साथ देखा जाए। किसी भी पक्ष को बिना स्वतंत्र पुष्टि के दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

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