आंध्र प्रदेश में चक्रवात मुरासु का कहर: 1.75 लाख लोग प्रभावित, पांच राज्यों में 38 NDRF टीमें तैनात
अमरावती/नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात मुरासु ने दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचाई है। 3 नवंबर 2026 की सुबह चक्रवात ने ओंगोल के आसपास तट पार किया। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण कई जगह पेड़ उखड़ गए, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हो गए और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई। चक्रवात का असर आंध्र प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों में भी देखने को मिला है।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के अधिकारियों के अनुसार, चक्रवात से पांच राज्यों में 1.75 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए कुल 38 NDRF टीमें तैनात की गई हैं। इनमें से 14 टीमें आंध्र प्रदेश में राहत कार्यों में जुटी हैं।
सुबह तटीय क्षेत्र से टकराया चक्रवात
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात मुरासु ने 3 नवंबर की सुबह लगभग 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के नजदीक दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार किया।
तट पार करने के दौरान चक्रवात की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रही, जबकि हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गए। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों में भारी बारिश हुई और समुद्र में ऊंची लहरें उठीं।
मौसम विभाग ने तटीय क्षेत्रों के निचले इलाकों में समुद्री जल के प्रवेश और जलभराव की आशंका को देखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी थी।

पेड़ उखड़े, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त; जनजीवन प्रभावित
चक्रवात के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में कई स्थानों पर नुकसान की खबर सामने आई है। तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई तथा सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ।
ओंगोल और आसपास के क्षेत्रों में राहतकर्मियों को सड़कों से गिरे हुए पेड़ों और मलबे को हटाने में लगाया गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, सड़क और अन्य आवश्यक सेवाओं को बहाल करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं।
1.75 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत शिविरों में पहुंचाए गए नागरिक
NDRF के अनुसार, चक्रवात से पांच राज्यों में 1.75 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में लगभग 10,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
प्रभावित नागरिकों के लिए 171 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम विभाग तथा स्थानीय अधिकारियों की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
NDRF के अधिकारियों ने बताया कि आंध्र प्रदेश में अब तक चक्रवात के कारण किसी की मौत की सूचना नहीं मिली थी। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। स्थिति में बदलाव के साथ नुकसान और प्रभावित लोगों के आंकड़ों की समीक्षा की जा रही है।
पांच राज्यों में राहत और बचाव अभियान
चक्रवात मुरासु के प्रभाव को देखते हुए पांच राज्यों में आपदा प्रबंधन की तैयारियां की गई हैं। कुल 38 NDRF टीमें राहत और बचाव कार्यों के लिए तैनात की गई हैं। आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक 14 टीमें काम कर रही हैं।
आपदा प्रबंधन दल प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत सामग्री पहुंचाने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सहायता देने और आवश्यक सेवाओं को बहाल करने में जुटे हैं।
प्रशासन ने स्थानीय अधिकारियों को आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने और प्रभावित नागरिकों तक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
फसल और कृषि क्षेत्र को भी नुकसान
चक्रवात के कारण आंध्र प्रदेश के कृषि क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है। शुरुआती आकलन के अनुसार, राज्य के 15 जिलों में 30,661 एकड़ से अधिक खड़ी फसल प्रभावित हुई है।
कृष्णा, बापटला और नंद्याल जिलों में फसलों को अधिक नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। धान, कपास और मक्का की फसलें प्रभावित हुई हैं। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहे हैं।
चक्रवात अब धीरे-धीरे कमजोर होने की संभावना
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, तट पार करने के बाद चक्रवात मुरासु धीरे-धीरे कमजोर पड़ने की संभावना है। इसके मंगलवार रात तक गहरे अवदाब में बदलने का अनुमान जताया गया है।
हालांकि, चक्रवात कमजोर होने के बावजूद आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश, जलभराव और तेज हवाओं का खतरा बना रह सकता है। प्रशासन ने लोगों से निचले इलाकों और समुद्र तटों से दूर रहने की अपील की है।
प्रशासन की नागरिकों से अपील
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की है कि वे:
- मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।
- समुद्र तट और निचले इलाकों से दूर रहें।
- क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों और तारों के पास न जाएं।
- जलभराव वाली सड़कों पर अनावश्यक आवाजाही से बचें।
- आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और राहत दलों से संपर्क करें।
चक्रवात मुरासु के बाद प्रभावित इलाकों में राहत, पुनर्वास और आवश्यक सेवाओं की बहाली का काम जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित रखना और नुकसान को कम करना है।
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यह खबर 3 नवंबर 2026 को उपलब्ध NDRF, IMD और समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। राहत कार्यों और नुकसान से जुड़े आंकड़ों में आगे बदलाव संभव है।