अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा, रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर अहम चर्चा

NSA अजीत डोभाल की वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से हनोई में मुलाकात

NSA अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा: रक्षा मंत्री समेत शीर्ष नेताओं से मुलाकात, भारत-वियतनाम सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर

हनोई / नई दिल्ली |भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक, रक्षा और सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सोमवार, 2 नवंबर 2026 को हनोई में अजीत डोभाल ने वियतनाम के उप प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने मौजूदा रक्षा सहयोग की समीक्षा की और भविष्य में सैन्य एवं रणनीतिक साझेदारी को और व्यापक बनाने पर सहमति जताई।

यह यात्रा ऐसे समय में हुई है, जब भारत और वियतनाम अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी कार्रवाई, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे लगातार प्राथमिकता में बने हुए हैं।

भारत के हनोई स्थित दूतावास ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुलाकात की जानकारी साझा की है।

वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से हुई अहम मुलाकात

अजीत डोभाल ने हनोई में जनरल फान वान जियांग के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। जनरल जियांग वियतनाम के उप प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय रक्षा मंत्री होने के साथ कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य भी हैं।

बैठक में दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा सहयोग की प्रगति पर चर्चा हुई। इसके साथ ही रक्षा क्षेत्र में आपसी संपर्क और सहयोग को आगे बढ़ाने के विभिन्न तरीकों पर विचार किया गया।

वियतनाम की ओर से रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग ने भारत के साथ रक्षा साझेदारी को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत-वियतनाम के व्यापक रणनीतिक संबंधों में रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

उन्होंने भारतीय रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को दिसंबर 2026 में हनोई में आयोजित होने वाले वियतनाम अंतरराष्ट्रीय रक्षा एक्सपो में भाग लेने और अपने उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए भी आमंत्रित किया।

वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री से भी मिले अजीत डोभाल

अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान अजीत डोभाल ने वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री जनरल लुओंग टैम क्वांग के साथ भी प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत की।

इस बैठक में दोनों देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा और व्यापक सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए। इसके साथ ही मौजूदा बहुआयामी संबंधों को और आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।

भारत और वियतनाम के बीच सुरक्षा सहयोग में आतंकवाद से मुकाबला, साइबर अपराधों पर नियंत्रण, आर्थिक सुरक्षा और उभरती तकनीकों से जुड़े विषय महत्वपूर्ण हैं।

मई 2026 में रणनीतिक साझेदारी को मिला था नया दर्जा

भारत और वियतनाम के संबंधों में यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मई 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ यानी उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाया था।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच व्यापक बातचीत हुई थी।

दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी।

भारत के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और वियतनाम के विजन 2045 को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की थी।

2030 तक रक्षा साझेदारी मजबूत करने का लक्ष्य

भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ‘ज्वाइंट विजन स्टेटमेंट ऑन इंडिया-वियतनाम डिफेंस पार्टनरशिप टुवर्ड्स 2030’ महत्वपूर्ण आधार है।

इस रूपरेखा के अंतर्गत दोनों देश कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों और प्रतिनिधिमंडलों का नियमित आदान-प्रदान।
  • सैन्य प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण।
  • संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सहयोग।
  • रक्षा उद्योग और सैन्य तकनीक के क्षेत्र में साझेदारी।
  • समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता।
  • बहुपक्षीय रक्षा मंचों पर आपसी सहयोग।
  • उभरती तकनीकों और आधुनिक रक्षा प्रणालियों में सहयोग।

दोनों देशों का उद्देश्य रक्षा संबंधों को केवल बातचीत तक सीमित न रखकर व्यावहारिक सहयोग और संस्थागत साझेदारी के रूप में विकसित करना है।

आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर भी बढ़ रहा सहयोग

अजीत डोभाल की यात्रा से पहले अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली में भारत-वियतनाम सुरक्षा संवाद का चौथा संस्करण आयोजित किया गया था।

इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारियों ने आतंकवाद विरोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, समुद्री गतिविधियों, आर्थिक सुरक्षा और उभरती तकनीकों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा की थी।

इस संवाद की सह-अध्यक्षता भारत के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पवन कपूर और वियतनाम के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के उप मंत्री सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल फाम थे तुंग ने की थी।

दोनों देशों ने क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों पर विचार साझा करते हुए आपसी सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।

भारत और वियतनाम के आर्थिक संबंध भी महत्वपूर्ण

भारत और वियतनाम के संबंध केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, शिक्षा और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्र में भी लगातार विस्तार हो रहा है।

मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति तो लाम की मुलाकात के दौरान दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था।

भारत के लिए वियतनाम दक्षिण-पूर्व एशिया में एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदार है। वहीं वियतनाम भी भारत के साथ व्यापार, रक्षा तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने में रुचि रखता है।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत-वियतनाम साझेदारी का महत्व

भारत और वियतनाम दोनों के लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समुद्री सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय हैं।

दक्षिण चीन सागर सहित इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का पालन दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है।

ऐसे में भारत और वियतनाम के बीच बढ़ता रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग क्षेत्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अजीत डोभाल की हनोई यात्रा दोनों देशों के बीच पहले से स्थापित रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल है।

NSA अजीत डोभाल की वियतनाम के रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से हनोई में मुलाकात
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 2 नवंबर 2026 को हनोई में वियतनाम के उप प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग से मुलाकात की।

निष्कर्ष: अजीत डोभाल की वियतनाम यात्रा से भारत और वियतनाम के बीच रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। दोनों देश वर्ष 2030 तक रक्षा साझेदारी को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, इस बैठक में किसी नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

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