प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी की मौत का रहस्य: CCTV, ग्राइंडर और पोस्टमार्टम ने बढ़ाए सवाल

प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी की मौत का रहस्य: CCTV, ग्राइंडर और पोस्टमार्टम ने बढ़ाए सवाल

 

वृंदावन/मथुरा। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े 25 वर्षीय शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की वृंदावन में हुई मौत का मामला अब कई सवालों के बीच जांच के घेरे में है। 25 सितंबर 2026 की सुबह बाराह घाट मार्ग स्थित गऊ/गुरु कृपा कुंज परिसर की चार मंजिला इमारत से गिरने के बाद दीपक को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती पुलिस जांच में मामला आत्महत्या की दिशा में देखा गया, लेकिन बाद में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, कमरे से बरामद कथित खून लगा ग्राइंडर और परिवार के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

 

CCTV में क्या दिखाई दिया?

 

पुलिस की शुरुआती जांच में CCTV फुटेज अहम साक्ष्य के तौर पर सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार फुटेज में दीपक अपने कमरे से निकलते और बाद में छत की ओर जाते दिखाई देते हैं। इसके बाद वह चौथी मंजिल से नीचे गिरते नजर आते हैं।

 

पुलिस इसी फुटेज और घटना से पहले के उनके अंतिम समय की गतिविधियों की जांच कर रही है। हालांकि, CCTV में किसी व्यक्ति का नीचे गिरना दिखाई देना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उससे पहले वास्तव में क्या हुआ था। इसलिए जांच का महत्वपूर्ण सवाल यही है कि गिरने से पहले दीपक के साथ क्या हुआ था।

 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

 

मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा दीपक के शरीर पर मिली चोटों को लेकर हो रही है।

 

रिपोर्टों के मुताबिक मौत का कारण अत्यधिक रक्तस्राव यानी Hemorrhagic Shock बताया गया है। शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें और फ्रैक्चर बताए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में सिर, पसलियों, पैर और फेफड़े से जुड़ी चोटों का भी उल्लेख है।

 

इसके अलावा पोस्टमार्टम में निजी अंग पर गंभीर चोट/कटने के निशान की बात सामने आई है। यही बिंदु इस मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

 

हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि पोस्टमार्टम में चोट का मिलना अपने आप में हत्या साबित नहीं करता। चोट किस परिस्थिति में लगी, गिरने से पहले या बाद में लगी और उसमें किसी दूसरे व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं—इन सवालों का जवाब पुलिस और फोरेंसिक जांच से ही सामने आएगा।

 

कमरे से मिला ग्राइंडर क्यों बना जांच का अहम हिस्सा?

 

पुलिस की जांच में दीपक के कमरे से एक इलेक्ट्रिक ग्राइंडर/कटर मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों में इसे कथित तौर पर खून के निशान वाला बताया गया है। फोरेंसिक टीम ने इसे जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है।

 

अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि ग्राइंडर का इस्तेमाल किस परिस्थिति में हुआ, उस पर मिले जैविक/फोरेंसिक साक्ष्य किससे संबंधित हैं और निजी अंग पर लगी चोट का इस उपकरण से कोई संबंध है या नहीं।

 

पुलिस मोबाइल फोन, CCTV और कमरे से मिले अन्य सामान की भी जांच कर रही है। कुछ रिपोर्टों में मोबाइल के डेटा और संभावित डिलीटेड चैट/वीडियो की जांच का भी उल्लेख है।

 

परिवार का क्या आरोप है?

 

जबलपुर से जुड़े दीपक के परिवार ने घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार के अनुसार, प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने के बाद पिछले करीब दो वर्षों में दीपक से उनका संपर्क बेहद सीमित हो गया था। परिजनों का दावा है कि वे उससे मिलने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें आसानी से मुलाकात नहीं हो पाती थी।

 

परिवार ने यह भी सवाल उठाया है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्हें आश्रम और अस्पताल के संबंध में स्पष्ट जानकारी हासिल करने में परेशानी हुई। कुछ परिजनों ने इसे सामान्य आत्महत्या मानने से इनकार किया है और घटना में साजिश की आशंका जताई है।

 

दीपक की मां लौंग बाई समेत परिवार की ओर से मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग किए जाने की खबरें सामने आई हैं। परिवार ने CBI जांच की मांग भी उठाई है।

 

यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि परिवार के ये आरोप उनका पक्ष हैं और अभी जांच में सिद्ध तथ्य नहीं हैं।

 

वृंदावन के संतों ने भी उठाए सवाल

 

दीपक की मौत के बाद वृंदावन के कुछ साधु-संतों की ओर से भी मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार संतों ने घटना की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच और CBI जांच की मांग उठाई है।

 

दिनेश फलाहारी महाराज समेत कुछ संतों द्वारा जांच की मांग किए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, संतों की ओर से उठाए गए सवाल भी घटना की परिस्थितियों को लेकर हैं; इनसे किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप स्वतः सिद्ध नहीं हो जाते।

 

आश्रम और प्रेमानंद महाराज का पक्ष क्या है?

 

मामले की रिपोर्टिंग में आश्रम प्रबंधन और प्रेमानंद महाराज की ओर से कोई ऐसा विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों का आधिकारिक जवाब मिल सके।

वृंदावन आश्रम में प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी की संदिग्ध मौत
CCTV, पोस्टमार्टम और कमरे से मिले ग्राइंडर के बाद दीपक लोधी की मौत का मामला जांच के घेरे में।

 

इसलिए खबर में आश्रम या प्रेमानंद महाराज पर किसी आरोप को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा। जांच पूरी होने तक उनकी भूमिका को लेकर निष्कर्ष निकालना भी जल्दबाजी होगी।

 

पुलिस की जांच किस दिशा में है?

 

पुलिस के सामने फिलहाल कई अहम सवाल हैं—

 

– दीपक चौथी मंजिल से किस परिस्थिति में नीचे गिरे?

– CCTV में घटना से पहले उनकी गतिविधियां क्या बताती       हैं?

– निजी अंग में गंभीर चोट कैसे लगी?

– कमरे में मिला ग्राइंडर किस काम में इस्तेमाल हुआ?

– ग्राइंडर पर मिले कथित रक्त के निशान किससे संबंधित हैं?

– क्या चोटें गिरने के दौरान लगीं या उससे पहले?

– मोबाइल फोन में घटना से पहले की कोई महत्वपूर्ण              जानकारी मौजूद है?

– क्या किसी अन्य व्यक्ति की घटना से पहले या बाद में          भूमिका रही?

– परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में क्या सामने        आता है?

 

इन सभी सवालों के जवाब फोरेंसिक रिपोर्ट, CCTV, मोबाइल डेटा, पोस्टमार्टम निष्कर्ष और पुलिस की आगे की जांच से मिलने की उम्मीद है।

 

राम रहीम के पुराने मामले का जिक्र क्यों हो रहा है?

 

इस घटना की चर्चा के दौरान सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़े पुराने साधुओं को कथित रूप से नपुंसक बनाए जाने के मामले का भी संदर्भ दिया जा रहा है।

 

उस पुराने मामले में CBI ने 400 से अधिक साधुओं को कथित रूप से जबरन नपुंसक बनाए जाने के आरोपों की जांच की थी। 2015 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI जांच का रास्ता खुला था।

 

लेकिन दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए राम रहीम से जुड़े मामले का उल्लेख केवल एक अलग, पुराना कानूनी संदर्भ है—इसे दीपक लोधी की मौत का कारण या प्रमाण नहीं माना जा सकता।

 

अब सबसे बड़ा सवाल—आत्महत्या, हादसा या कुछ और?

 

इस समय उपलब्ध सूचनाओं से यह कहना जल्दबाजी होगी कि दीपक लोधी की मौत आत्महत्या थी, हादसा था या किसी आपराधिक घटना का परिणाम।

 

CCTV से उनके नीचे गिरने की घटना की पुष्टि संबंधी रिपोर्टें सामने आई हैं, जबकि पोस्टमार्टम में अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर चोटों की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, कमरे से मिला कथित खून लगा ग्राइंडर और निजी अंग पर गंभीर चोट ने जांच के नए सवाल खड़े किए हैं। परिवार और कुछ संत हत्या/साजिश की आशंका जता रहे हैं और CBI जांच की मांग कर रहे हैं।

 

लेकिन फिलहाल हत्या का आरोप सिद्ध नहीं हुआ है और किसी व्यक्ति या आश्रम को इस मौत के लिए जिम्मेदार ठहराना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।

 

निष्कर्ष

 

वृंदावन के एक आश्रम परिसर में 25 वर्षीय साधक दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ CCTV और शुरुआती पुलिस जांच आत्महत्या की दिशा की ओर इशारा करती है, तो दूसरी तरफ पोस्टमार्टम में सामने आई चोटें, निजी अंग से जुड़ा मामला, कमरे से बरामद कथित खून लगा ग्राइंडर और परिवार के आरोप जांच को कई दूसरे कोणों से देखने की जरूरत पैदा करते हैं।

 

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका फोरेंसिक जांच, CCTV की पूरी टाइमलाइन, मोबाइल डेटा, पोस्टमार्टम निष्कर्ष और पुलिस की आगे की जांच की होगी। इन्हीं तथ्यों से स्पष्ट हो सकेगा कि 25 सितंबर की सुबह गुरु/गऊ कृपा कुंज परिसर में आखिर हुआ क्या था।

 

नोट: इस खबर में परिवार, संतों और अन्य पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों को आरोप/दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।

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