कथारा में संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज का भव्य स्वागत, उमड़ा हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब

कथारा ऑफिसर्स क्लब में संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज का भव्य नागरिक अभिनंदन, स्वर्वेद संदेश-यात्रा में उमड़ा जनसैलाब

कथारा ऑफिसर्स क्लब में संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज का नागरिक अभिनंदन
कथारा ऑफिसर्स क्लब में स्वर्वेद संदेश-यात्रा के दौरान संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज का भव्य नागरिक अभिनंदन।

 

जगदीश भारती/कथारा। कथारा सीसीएल ऑफिसर्स क्लब में रविवार, 6 सितंबर को विहंगम योग संत समाज के तत्वावधान में एकदिवसीय भव्य आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज के कथारा में प्रथम आगमन पर श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों की ओर से भव्य एवं भावपूर्ण नागरिक अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में कोयलांचल के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

 

यह आयोजन आगामी 14 और 15 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित उमराहा के स्वर्वेद मंदिर धाम में प्रस्तावित 103वें वार्षिक सम्मेलन एवं 25,000 कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान-महायज्ञ (समर्पण दीप अध्यात्म महोत्सव) के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से आयोजित स्वर्वेद संदेश-यात्रा के तहत किया गया।

 

गाजे-बाजे और पुष्पवर्षा के साथ हुआ स्वागत

 

स्वर्वेद संदेश-यात्रा के क्रम में संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज हजारीबाग से होते हुए रविवार शाम करीब 6 बजे कथारा के बीटीपीएस मोड़ पहुंचे। उनके आगमन की सूचना पर पहले से ही बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और युवा श्रद्धालु वहां मौजूद थे।

 

श्रद्धालुओं ने सनातन परंपरा के अनुरूप गाजे-बाजे, पुष्पवर्षा और आतिशबाजी के साथ संत प्रवर का भव्य स्वागत किया। इसके बाद श्रद्धालुओं की ओर से विशाल पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा कथारा के मुख्य मार्ग से गुजरते हुए सीसीएल ऑफिसर्स क्लब स्थित कार्यक्रम स्थल तक पहुंची।

 

श्वेत ध्वज फहराया, पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

 

कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज ने स्वर्वेद के प्रतीक ‘अ’ अंकित श्वेत ध्वज फहराया। इसके साथ ही उन्होंने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

 

मंच पर पहुंचने के बाद संत प्रवर ने प्रथम सदगुरु सदाफलदेव जी महाराज सहित अन्य सदगुरुओं के चित्र पर नमन किया और दीप प्रज्ज्वलित कर आध्यात्मिक कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

 

‘ईश्वर का वास मनुष्य की अंतरात्मा में है’

 

अपने प्रवचन में संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज ने ब्रह्मविद्या और विहंगम योग के विभिन्न आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को ईश्वर की तलाश बाहर करने के बजाय अपनी अंतरात्मा में करनी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि अंतरात्मा में प्रेम की तरंगें विद्यमान हैं और परमात्मा का वास कहीं बाहर नहीं, बल्कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर है। उन्होंने मानव जीवन में विचारों, संकल्पों और समय के महत्व को भी समझाया।

 

संत प्रवर ने कहा कि समय और जीवन किसी की प्रतीक्षा नहीं करते, बल्कि अपनी गति से निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं। ब्रह्मविद्या मनुष्य को परमेश्वर के सच्चिदानंद स्वरूप को पहचानने और आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाती है।

 

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने विचारों और संकल्पों को ऊंचा रखने का आह्वान करते हुए कहा कि मनुष्य के सपने और संकल्प भी ऐसे होने चाहिए, जो उसे भव-बंधन से मुक्ति की दिशा में ले जाएं।

 

अतिथियों और प्रतिनिधियों को किया गया सम्मानित

 

कार्यक्रम के दौरान विहंगम योग संत समाज की ओर से उपस्थित अतिथियों, प्रतिनिधियों और शिष्यों को अंगवस्त्र एवं शॉल प्रदान कर सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम में कथारा जीएम, पीओ, थाना प्रभारी राजेश कुमार, विभिन्न श्रमिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि, यूनियन नेता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे। इनमें अजय सिंह, अनिल अग्रवाल, सुखनंदन सिंह, उदय प्रताप सिंह, केपी श्रीवास्तव और बिंदेश्वरी दुबे सहित अन्य लोग शामिल रहे।

 

कार्यक्रम के आयोजन में बोकारो जिला संयोजक नीलकंठ रविदास, कोयलांचल संयोजक आनंद केशरी, केपी सिंह, जानकी यादव और मधु खत्री समेत अन्य आयोजकों एवं कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

 

ग्रामीण एवं क्षेत्रीय प्रतिनिधियों में पंचानन साव, नरेश मिश्रा, गंगा साव, प्यारेलाल यादव, विकास सिंह, परमेश्वर नायक, फुलेश्वरी देवी, नगर परिषद सदस्य वार्ड 28 मालती देवी, वैदेही श्रीवास्तव, अजीत जायसवाल, छोटी रजक, सुखलाल महतो, गणेश साव, अशोक सोनी, प्रदीप कुमार प्रसाद, प्रभात सिंह, गुरुचरण, द्वारिका प्रसाद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

 

कोयलांचल के कई इलाकों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु

 

कार्यक्रम में कथारा, स्वांग, जारंगडीह, गोमिया, तेनुघाट, बेरमो, फुसरो, नावाडीह, मकोली, बोकारो, चंद्रपुरा, बीटीपीएस, पिछरी, अंगवाली, झुंझको, चांदो, जैनामोड़, पेटरवार और कसमार समेत कोयलांचल के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

 

श्रद्धालुओं की बड़ी मौजूदगी के कारण कथारा ऑफिसर्स क्लब परिसर में पूरे दिन आध्यात्मिक माहौल बना रहा। कार्यक्रम में लोगों ने संत प्रवर का प्रवचन सुना और विहंगम योग एवं ब्रह्मविद्या से संबंधित आध्यात्मिक संदेशों को आत्मसात किया।

 

महाप्रसाद के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन

 

कार्यक्रम के अंत में सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों ने सामूहिक रूप से महाप्रसाद ग्रहण किया। आयोजन के सफल समापन के बाद संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज बोकारो के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया।

 

स्वर्वेद संदेश-यात्रा का उद्देश्य आध्यात्मिक जागरूकता और स्वर्वेद के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना बताया गया। कथारा में आयोजित कार्यक्रम में उमड़ी भीड़ ने आयोजन को क्षेत्र का एक प्रमुख आध्यात्मिक कार्यक्रम बना दिया।

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