बोकारो में दूसरे के नाम का SIM साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप, 2 गिरफ्तार

बोकारो में दूसरे के नाम का SIM साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप, 2 गिरफ्तार; 182 से ज्यादा SIM की जांच

 

पी. सोनी कुमारी: क्या आपके नाम और दस्तावेज पर जारी SIM कार्ड का इस्तेमाल कोई और साइबर अपराध में तो नहीं कर रहा? बोकारो पुलिस की हालिया कार्रवाई ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है। पुलिस ने चास अनुमंडल क्षेत्र में ऐसे दो POS एजेंटों को गिरफ्तार किया है, जिन पर दूसरे लोगों के आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल कर SIM एक्टिवेट करने और उन्हें कथित तौर पर साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप है।

 

चास अनुमंडल के ASP वेदांत शंकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बरमसिया ओपी पुलिस को सूचना मिली थी कि POS एजेंट प्रदीप दास ने जुलाई से अगस्त के बीच 140 से अधिक SIM कार्ड कथित तौर पर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए, जबकि मुकेश गोप ने 42 SIM कार्ड उपलब्ध कराए। पुलिस के अनुसार इन SIM को दूरसंचार विभाग के निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर जारी किया गया था।

 

पैसे के लालच में दूसरे के दस्तावेज से SIM एक्टिवेट करने का आरोप

 

पुलिस के मुताबिक हिरासत में पूछताछ के दौरान प्रदीप दास और मुकेश गोप ने कथित तौर पर बताया कि वे पैसे के लालच में दूसरे लोगों के आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट लेकर SIM एक्टिवेट करते थे।

 

पुलिस का आरोप है कि इसके बाद ये SIM परमीत महथा, राहुल कुमार और विवेक चौधरी तक पहुंचाए जाते थे। पुलिस के अनुसार दोनों POS एजेंटों को प्रत्येक SIM के बदले करीब 800 रुपये मिलते थे।

 

जांच एजेंसियों के अनुसार कथित तौर पर इन SIM का इस्तेमाल फर्जी बैंक अकाउंट और अन्य माध्यमों के जरिए साइबर अपराध तथा वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।

बोकारो पुलिस की कार्रवाई में बरामद मोबाइल और SIM कार्ड
बोकारो में साइबर अपराधियों तक SIM पहुंचाने के आरोप में दो POS एजेंट गिरफ्तार।

 

182 से ज्यादा SIM पुलिस जांच के दायरे में

 

पुलिस द्वारा बताई गई संख्या के अनुसार प्रदीप दास से जुड़े 140 से अधिक और मुकेश गोप से जुड़े 42 SIM सामने आए हैं। यानी कम से कम 182 SIM पुलिस की जांच के दायरे में हैं।

 

अब जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि इन SIM का वास्तविक इस्तेमाल किन लोगों ने किया और इनके जरिए कितने साइबर अपराध किए गए।

 

जांच टीम ने कार्रवाई कर दोनों को भेजा जेल

 

सूचना मिलने के बाद बरमसिया ओपी प्रभारी और चंदनकियारी थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई। जांच के बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।

 

पुलिस ने दोनों के कब्जे से Samsung Galaxy A17 5G मोबाइल, दो Airtel SIM तथा Realme 12X 5G मोबाइल, जिसमें Airtel और Jio के SIM लगे थे, बरामद किए हैं।

 

पुलिस के अनुसार मामले में साइबर थाना में IT Act तथा टेलीकॉम कानून की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अन्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कार्रवाई जारी है।

 

आपके नाम पर SIM है तो जरूर बरतें सावधानी

 

इस मामले के बाद सबसे बड़ा सवाल आम लोगों की सुरक्षा को लेकर है। अगर किसी व्यक्ति के पहचान दस्तावेज या बायोमेट्रिक जानकारी का गलत इस्तेमाल कर SIM जारी हो जाए, तो उसका दुरुपयोग साइबर अपराध में किया जा सकता है।

 

इसलिए अपना Aadhaar Card, फिंगरप्रिंट, OTP और अन्य पहचान संबंधी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा करने से बचें। SIM लेते समय भी यह सुनिश्चित करें कि प्रक्रिया अधिकृत माध्यम से ही हो रही है।

 

अगर आपको संदेह है कि आपके नाम पर कोई ऐसा SIM सक्रिय है जिसका आप इस्तेमाल नहीं करते, तो संबंधित दूरसंचार सेवा प्रदाता और साइबर अपराध हेल्पलाइन/पुलिस से संपर्क कर इसकी जानकारी दें।

 

पुलिस की कार्रवाई से सामने आया SIM के दुरुपयोग का नेटवर्क

 

बोकारो पुलिस की इस कार्रवाई में केवल दो POS एजेंटों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में जारी किए गए SIM की जांच का पहलू भी सामने आया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन SIM का इस्तेमाल कहां-कहां और किन साइबर अपराधों में किया गया।

 

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ कथित SIM नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और साइबर अपराधों के बारे में और जानकारी सामने आने की संभावना है।

 

महत्वपूर्ण: पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं। आरोपियों के खिलाफ अंतिम दोष सिद्धि न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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