धनबाद में श्रद्धा और उल्लास के साथ निकली श्रीजगन्नाथ बहुदा (पुनर्यात्रा), सैकड़ों श्रद्धालु हुए शामिल

धनबाद में श्रीजगन्नाथ बहुदा (पुनर्यात्रा) के दौरान भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल श्रद्धालु।

धनबाद में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया श्रीजगन्नाथ बहुदा (पुनर्यात्रा) महोत्सव, रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

धनबाद में श्रीजगन्नाथ बहुदा (पुनर्यात्रा) के दौरान भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल श्रद्धालु।
धनबाद के जगजीवन नगर में श्रीजगन्नाथ बहुदा (पुनर्यात्रा) महोत्सव के दौरान निकली भव्य रथयात्रा।

धनबाद | धनबाद के जगजीवन नगर स्थित मानस मंदिर में शुक्रवार को श्रीजगन्नाथ बहुदा (पुनर्यात्रा) महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। मानस प्रचार समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र (बलदाऊ) की वापसी रथयात्रा में अपनी आस्था व्यक्त की।

मौसी बाड़ी से निकली भव्य पुनर्यात्रा

महोत्सव की शुरुआत शाम करीब 4 बजे सीएमपीएफ स्थित कल्याणेश्वर महादेव मंदिर (मौसी बाड़ी) से हुई। यहां भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र को विधिवत भोग अर्पित कर आरती की गई। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवान की वापसी रथयात्रा प्रारंभ हुई।

बैंड-बाजों और जयघोष के बीच निकली रथयात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरा वातावरण “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा।

इन मार्गों से होकर निकली रथयात्रा

रथयात्रा जगजीवन नगर, सरायढेला, स्टील गेट, न्यू कॉलोनी और डॉक्टर्स कॉलोनी से गुजरते हुए भगवान के स्थायी निवास मानस मंदिर, जगजीवन नगर पहुंची। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया और प्रसाद का वितरण किया गया।

मानस मंदिर में हुई महाआरती

मानस मंदिर पहुंचने पर भगवान जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और भगवान बलभद्र का भव्य स्वागत किया गया। पंडित ज्योति नारायण झा एवं पंडित विनोद तिवारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए।

इसके बाद आयोजित महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आरती के पश्चात सभी भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

समिति के सदस्यों ने निभाई अहम भूमिका

महोत्सव के सफल आयोजन में मानस प्रचार समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन को सफल बनाने में समिति के कई सदस्यों एवं स्वयंसेवकों का विशेष योगदान रहा, जिन्होंने व्यवस्था, स्वागत, प्रसाद वितरण और रथयात्रा संचालन में अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

श्रद्धालुओं ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का सुंदर उदाहरण बताया।

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