
बोकारो। चोरी, छिनतई और वाहन चोरी जैसे मामलों में गिरफ्तार आरोपियों के साथ बोकारो पुलिस के अलग-अलग व्यवहार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। खासकर इस बात पर कि किसी आरोपी का चेहरा सार्वजनिक किया जाता है, जबकि किसी अन्य आरोपी का चेहरा पुलिस ढककर पेश करती है। आखिर यह किस नियम या कानून के तहत किया जाता है, इसे लेकर अब भी स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
हाल ही में पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी तीन अलग-अलग प्रेस विज्ञप्तियों और उनके साथ साझा की गई तस्वीरों में यह अंतर साफ दिखाई देता है। तीनों मामलों में आरोप चोरी या छिनतई से जुड़े हैं, लेकिन आरोपियों की तस्वीरें अलग-अलग तरीके से जारी की गई हैं।
घर में चोरी के मामले में आरोपी का चेहरा सार्वजनिक
पुलिस अधीक्षक कार्यालय के अनुसार, बालीडीह थाना कांड संख्या-118/2026 (20 जुलाई 2026) में महेश नायक उर्फ लेल्ला नायक उर्फ लेल्हा नायक (28 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। आरोपी न्यू कॉलोनी, कुर्मीडीह, गणेश होटल के समीप का रहने वाला है। उस पर घर में घुसकर चोरी करने और चोरी का सामान रखने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इस मामले में जारी तस्वीर में आरोपी का चेहरा पूरी तरह सार्वजनिक दिखाई देता है।
स्कूटी चोरी के मामले में भी गिरफ्तारी
दूसरे मामले में हरला थाना कांड संख्या-67/2026 के तहत 19 जुलाई 2026 को चोरी हुई एक टीवीएस जूपिटर स्कूटी को पुलिस ने 48 घंटे के भीतर बरामद करने का दावा किया। पुलिस के अनुसार, तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक विधि-विरुद्ध किशोर की निशानदेही पर गर्व आदर्श (18 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। आरोपी हरला थाना क्षेत्र के सेक्टर-8/डी का निवासी है। उसे न्यायिक प्रक्रिया के तहत अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया गया।
मंगलसूत्र छिनतई मामले में आरोपी गिरफ्तार
तीसरे मामले में बीएस सिटी थाना क्षेत्र की कॉर्पोरेट कॉलोनी में महिला से मंगलसूत्र छिनतई की घटना के बाद पुलिस ने अजीत कुमार उर्फ मुस्कान (23 वर्ष) को गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर छीना गया मंगलसूत्र भी बरामद करने का दावा किया है। आरोपी के विरुद्ध पहले से भी लूट और चोरी के कई मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। उसे भी न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
एक ही तरह के मामलों में अलग-अलग तरीका क्यों?
तीनों मामलों में आरोप चोरी या छिनतई से जुड़े हैं, लेकिन पुलिस द्वारा जारी तस्वीरों में आरोपियों के चेहरे को लेकर अलग-अलग तरीका अपनाया गया है। इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि यदि किसी आरोपी का चेहरा सार्वजनिक किया जाता है तो दूसरे का चेहरा क्यों ढका जाता है? क्या इसके लिए कोई निर्धारित कानूनी प्रावधान या विभागीय दिशा-निर्देश हैं?
पूर्व में भी इस विषय पर तत्कालीन बोकारो पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह से सवाल पूछा गया था, लेकिन इसका स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया था। अब एक बार फिर ऐसे मामलों के बाद यह प्रश्न चर्चा में है कि पुलिस द्वारा अपनाए जा रहे इस अलग-अलग व्यवहार का आधार क्या है।
नोट: इस समाचार में दर्ज आपराधिक मामलों और गिरफ्तारियों का विवरण पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों पर आधारित है। आरोपियों के विरुद्ध आरोप न्यायालय में विचाराधीन हैं और दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाते हैं।)